मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एक निजी एजेंसी स्काइमेट ने बुधवार को कहा की इस साल मानसून में सामने से कम बारिश हो सकती है।
एजेंसी ने संभावित सामान्य से कम बारिश के पीछे की वजह अलनीनो को बताया है एजंसी ने बताया की मानसून के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 93 फीसदी रहने की संभावना है।
दरअसल एलपीए की 90-95 फीसदी बारिश सामान्य से कम वाली श्रेणी में आती है 1951 से 2000 के बीच हुई कुल बारिश के औसत को एलपीए कहा जाता है और यह 89 सेमी है यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है ये लगातार दूसरा वर्ष होगा जब सामान्य से कम वर्षा होगी पूर्वी भारत में सबसे कम बारिश हो सकती है।
पूर्वानुमान में कहा गया है की ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश में पूरे मौसम में सामान्य बारिश होने की संभावना है स्काइमेट के सीईओ जतिन सिंह ने बताया कि जून में एलपीए की 77 प्रतिशत बारिश देखने को मिल सकती है जबकि जुलाई में एलपीए की 91 प्रतिशत बारिश हो सकती है सिंह ने बताया की पूर्वानुमान के अनुसार जून और जुलाई में सामने से कम बारिश हो सकती है।
अगस्त और सितम्बर में एलपीए के 102 प्रतिशत और 99 प्रतिशत बारिश हो सकती है स्काईमेट ने संभावित सामान्य से कम बारिश के पीछे अल-नीनो को जिम्मेदार ठहराया है।
स्काइमेट के अध्यक्ष एयर वाइस मार्शल जीपी शर्मा ने बताया की अलनीनो का मानसून पर प्रभाव पड़ता है उन्होंने कहा की प्रशांत महासागर औसत से अधिक गर्म हो गया है मार्च मई के दौरान अनुमानों में अलनीनो की 80 प्रतिशत संभावना है जो जून से अगस्त तक 60 प्रतिशत तक कम होती है।
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