इंसान के मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी से मुश्किल भी आसान हो जाती है ऐसी ही मुश्किलों से निकल कर ये शख्स अरबपति बन गया।
आज हम आपको दुनिया के सबसे आमिर आदमियों ने शुमार इस इंसान के बारे में जो कभी अपने बच्चो का पेट पालने के लिए कभी चाट पकोड़ी बेचा करता था हम बात कर रहे है धीरू अम्बानी की जिनका जन्म 28 दिसम्बर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ में जन्मे धीरू भाई अम्बानी से शायद ही कोई इंसान अनजान है
धीरू भाई अम्बानी का बचपन बड़ी आर्थिक मुसीबतो से गुजरा था ना तो उनके पास कोई बैंक बेलेंस था और ना ही पिता के पास कोई सम्पति थी उनके पिता स्कूल टीचर थे धीरू भाई अम्बानी ने अपनी पिट की मौत के बाद घर की साड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली जिस आदमी के कभी पैसे नहीं थे आज वो करोड़ो लोगो के पेट पालने में सक्षम है।
धीरू भाई अम्बानी परिवार की जिम्मीरिया संभालने के लिए अपनी पढाई को बीच में ही छोड़ दिया सूत्रों के मुताबिक, वो हर शनिवार और रविवार को गिरनार पर्वत के पास तीर्थयात्रियों को चाट-पकौड़ी बेचा करते थे पिता की मौत ने उन्हें पूरी तरह से अकेला कर दिया था उनके पास किसी का कोई सहारा नहीं था इसके बाद धीरू भाई अम्बानी ने 1949 में काबोटा नाम की शिप में में काम किया।
वहां पर उन्होंने कुछ पैसे जमा किया 1958 में वो 50 हजार रूपये लेके वापिस भारत लोटे और मसलो का छोटा मोटा काम शुरू किया और उसके बाद रिलायंस कंपनी खोलकर कपडा ट्रेडिंग कम्पनी खोली जिसके बाद वे कभी नहीं रुके।
और अपनी कंपनी को आगे बढ़ाते चले गए नतीजा ये रहा की 6 जुलाई 2002 को जब उनका निधन हुआ तब तक रिलायंस 62 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी थी यमन ने उनकी सेलेरी 200 रूपये थी आज उनके बेटे मुकेश अम्बानी को देश के सब आमिर आदमियों में शुमार किया जाता है।
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