पुरे देश में दवाइयों के नाम पर मरीजों से काफी लूटपाट चल रही है।
अब मरीजों को भ्रमित करने वाली एक जैसे नाम की दवाओं पर लगाम लगेगी औषधि परीक्षण परामर्श बोर्ड, डीटैबद्ध इससे जुड़े प्रस्ताव पर अगले सप्ताह फैसला ले सकता है इसके बाद कंपनियों को दवा का नाम ब्रांड का नाम ड्रग कंट्रोलर के पास पंजीकृत कराना होगा और नाम अन्य कंपनी से मिलता जुलता होने पर बदलाव करना अनिवार्य होगा।
ये प्रस्ताव एक जैसे नाम वाली अलग अलग बीमारियों की दवाओं के चलते मरीजों और तीमारदारों में पनपने वाले भ्रम को समाप्त करने को लाया गया है मौजूदा समय में मार्केट में एक ही नाम को ये फिर मिलते जुलते नाम वाली कई दवाइयाँ मौजूद है।
इसकी सबसे बड़ी वजह ये है की दवाओं के ब्रांड का नाम पंजीकृत कराना अनिवार्य नहीं है ऐसे में कई कमपनीय अपनी दवाओं के शुरूआती नाम किसी चर्चित या जानी-पहचानी दवा के नाम पर रख देती हैं जैसे एल्फ्लॉक्स एंटीबायोटिक है और एल्फॉक्स एक मिर्गी की दवा भी है।
एल्फ्लॉक्स के साथ नॉरफ्लॉक्सिन जुड़ा है जबकि एल्फॉक्स में ऑक्सकरबाजेपाइन बाद में आता है इसके आलावा इन दवाइयों का पहला अक्षर बड़े अक्षरों में होता है और आगे के नाम छोटे अक्षरों में रहते है डॉ. सुनील दोहरे के मुताबिक कई कंपनियों की दवाओं के नाम मिलते जुलते हैं ऐसे में मरीज कई बार भर्मित हो जाते है और ऐसे में मरीज को काफी नुकशान उठाना पड़ सकता है सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक डीटैब 29 नवंबर को इस मुद्दे पर बैठक कर फैसला लेगी अगर वह प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है तो आने वाले दिनों में दवा कंपनियों को ब्रांड का नाम ड्रग कंट्रोलर के पास पंजीकृत कराना होगा।
अभी तक ऐसा कोई नियम नहीं बनाया हुआ था इसकी वजह से एक जैसे नाम की दवाये बाजार में उपलब्ध थी उन्होंने आगे बताया की ट्रेडमार्क अधिनियम में भी दवाओं का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है ऐसे में इस नई व्यवस्था के तहत भ्रम पैदा करने वाली स्थितियों को समाप्त करने का निर्णय लिया जाएगा इस समय दवाई का पंजीकरण उसके जेनेरिक नाम पर होता है अब आने वाले दिनों जेनेरिक के साथ ब्रांड का नाम भी कपंनियों को दर्ज कराना होगा और मिलता.जुलता या समान नाम होने पर बदलाव की प्रक्रिया भी होगी।
अधिकारी ने कहा की इस समय बाजार में 10 हजार से भी ज्यादा दवाये बाजार में मौजूद है जिनके नाम मिलते जुलते है इसकी चपेट में करीब 25 फीसद दवा बाजार है गौरतलब है कि प्रस्ताव पर डीटैब के निर्णय लेने के बाद सरकार एक सरकारी आदेश जारी कर ड्रग कंट्रोलर के समक्ष पंजीकरण कराने की व्यवस्था को लागू कर सकती है इसके बाद बड़े पैमाने पर बाजार में बिक रही दवाओं के नाम बदल सकते हैं।
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