यादव चाचा भतीजे की लड़ाई की आग में बीजेपी सेक रही है अपनी रोटी ,आप भी जाने यहाँ कैसे

इस समय राजनीती में काफी उथल पुथल चल रही है लोकसभा चुनावो के बाद सभी पार्टिया अपनी सरकार  बनाने के जोड़ तोड़ में लगी हुयी है अखिलेश यादव के गढ़ में भाजपा ने कड़ी तैयारी क़र ली है। 


 2009 में जब अखिलेश यादव के फिरोजाबाद सीट खाली करने की बाद हुए उपचुनाव में यादव परिवार को इस सीट पर  अपने राजनितिक जीवन की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा था 2014 में भले ही बीजेपी और उसके साथी दलों ने उत्तरप्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटे जित ली हो लेकिन 7 सीटे अभी भी के लिए एक अभूझ पहेली बनी हुयी है। 


 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इन 7 अभेद्य किले को भेदने के लिए नई-नई रणनीति बना रहे हैं। 


 परिवार की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल अपना पहला चुनाव हार गईं  थी सपा से कांग्रेस में आये राज बब्बर ने डिम्पल  यादव को करीब 67 हजार वोटो से मात दी थी। 


 बीजेपी इस बार यादव परिवार की आपसी लड़ाई के बहाने इस सीट पर कब्जा जमाने की फ़िराक में है बीजेपी ने इस बार लोधी राजपूत जाति के चन्द्रसेन को उम्मीदवार बनाया है इस सीट का जातिगत गणित देखें तो 16 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली इस सीट पर 5 लाख के करीब यादव वोटर है यानि की करीब आधे वोटर इन दो जातियों के है। 


ऐसे में अगर यादव वॉर चाचा भतीजा में बंटता है तो बीजेपी का इसका फायदा जरूर मिलेगा बीजेपी इस सीट के लिए पूरी ताकत लगा रही है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह फिरोजाबाद में रैली कर चुके हैं जबकि केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली प्रस्तावित है। 

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