5 जुलाई को सरकार दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करेगी इसे वित् मंत्री निर्मला सीताराम पेश करने वाली है नई सरकार की योजना अर्थव्यवस्था को 2024 तक 5 लाख करोड़ डॉलर तक ले जाने की है।
इसके लिए यूनियन बजट में लगभग 8 फीसदी वार्षिक वृद्धि के लिए स्ट्रेटेजी की दरकार होगी इससे देश में नोकरियो को बढ़ावा मिलेगा जिससे ना केवल हमारे कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी बल्कि उनकी जरूरत भी पूरी होगी देश में नौकरी को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है।
पहला कदम है छोटी इकाइयों पर अनुपालन का भारी भोझ है इन्हे सालाना 60,000 संभावित अनुपालन और कम से कम 3000 फाइलिंग्स की जटिलताओं से गुजरना होता है सरकार को चाहिए की वह उद्यमों/कर्मचारियों के बीच पेपरलेस, कैशलेस, प्रेजेंसलेस व्यवस्था की शुरुआत करे ताकि अनुपालन के बोझ को कम किया जा सके
दूसरा निरिक्षणो और निरीक्षकों के तनाव को कम करने के लिए आयकर के सभी विभागों में ई-असेसमेंट की व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए ये MSME की उत्पादकता बढ़ाएगा, जिससे उन्हें अधिक वेतन के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता और प्रोत्साहन मिलेगा अनुपालन बोझ को कम करने के लिए एमसीए की और से शुरू की गयी AGILE फॉर्म प्रक्रिया को विभागों में बढ़ाया जाना चाहिए।
सिंगल फॉर्म ने बैकेंड में छह विभागों को एकीकृत किया, एक नई कंपनी और उसके कर्मचारियों को जीएसटी, ईएसआईसी और ईपीएफओ के साथ रजिस्टर्ड करके सीधे औपचारिक प्रणाली में शामिल किया। देश में नए व्यवसाय शुरू करने और संचालन के बोझ को कम करने के लिए यूनिवर्सल एंटरप्राइज नंबर की आवश्यकता है फ़िलहाल एक उधम को विभिन्न सरकारी के साथ दो दर्जन से अधिक संख्याओं के लिए रजिट्रेशन करना पड़ता है एक नम्बर रहेगा तो कम्पनियो के लिए कागजी कार्यवाही बोझ कम होगा और सरकार के लिए ट्रेकिंग अनुपालन आसान हो जायेगा।
चौथा, फिलहाल 25,000 रुपये तक मासिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए वैधानिक कटौती, सकल वेतन का 40 फीसद तक कम कर सकती है इसमें नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों को घाटा है कम वेतन वाले कर्मचारियों द्वारा योगदान को या तो वैकल्पिक बनाया जा सकता है या सब्सिडी दी जा सकती है पीएमआरपीवाई ने अब तक अच्छा काम किया है और इसे तीन साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।
पांचवा है अपने कार्यबल को पूरा करने की समस्या को ठीक करने का सबसे तेज अप्रेंटिसशिप हैहालाँकि अपेक्षित संख्या में सब्सिडी देने की सरकार की क्षमता बहुत ही अपर्याप्त है हमे अपने अर्थव्यवस्था के लिए 15 मिलियन अपरेंटिस की आवश्यकता है, सब्सिडी के बजाय हमें एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है जो अप्रेंटिसशिप को प्रोत्साहित करे हालाँकि ये सुधर इतनी जल्दी तो नहीं हो सकते है लेकिन इसकी शुरुआत तो की जा सकती है।
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